॥ समाज कोश ॥

पुष्करणा समाज, एक जगह

नई पीढ़ी और राजस्थान से दूर रहने वाले परिवारों के लिए: हम कहाँ से हैं, परिवार कैसे पहचाने जाते हैं, हमारे मूल्य क्या हैं, और हमारी शादियाँ कैसे होती हैं।

समाज का इतिहास परिवारों और बड़ों से आगे बढ़ता है, और हर परिवार की बातों में थोड़ा अंतर होता है। यह एक सामान्य परिचय है; अपनी वंश परंपरा और रीतियों के लिए अपने बड़े और पारिवारिक पंडित जी ही सबसे अच्छे मार्गदर्शक हैं।

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मूल

पुष्कर से दुनिया तक

पुष्करणा नाम परंपरा से अजमेर के पास पवित्र सरोवर वाले पुष्कर से जुड़ा है। सदियों में समाज पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय नगरों में फैला, और वहाँ से व्यापार, नौकरी और पढ़ाई के लिए गुजरात और देश के बड़े शहरों तक, और फिर विदेश तक। मूल स्थान, यानी "गाँव", दूर जन्मे परिवारों की पहचान का भी हिस्सा रहता है।

  1. पुष्करपवित्र सरोवर
  2. पश्चिमी राजस्थानमरुस्थल के नगर
  3. पूरा भारतव्यापार, नौकरी, पढ़ाई
  4. पूरी दुनियाखाड़ी, ब्रिटेन, अमेरिका
ज़्यादातर परिवारों के मूल नगर जोधपुर बीकानेर जैसलमेर पोकरण फलोदी
फिर पूरे भारत मेंKutchSaurashtraमुंबईअहमदाबादकोलकातादिल्लीपुणेबेंगलुरु
और विदेश मेंखाड़ी देशयूनाइटेड किंगडमउत्तरी अमेरिका
पूरा परिचय पढ़ें
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पहचान

गोत्र और अवटंक

गोत्र

परिवार की वंश परंपरा को किसी ऋषि से जोड़ता है। एक ही गोत्र (सगोत्र) में विवाह नहीं होता, और ज़्यादातर परिवार माँ का गोत्र, यानी ननिहाल गोत्र, भी टालते हैं। यह साइट हर प्रोफ़ाइल पर दोनों की जाँच करती है।

अवटंक

परिवार का उपनाम। हर अवटंक किसी गोत्र से जुड़ा है, इसलिए बड़े अक्सर उपनाम सुनते ही गोत्र बता देते हैं।

समाज के कुछ अवटंक अवटंक और गोत्र गाइड पढ़ें
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जो हम सँजोते हैं

समाज के मूल्य

विद्या का सम्मानविद्वानों, शिक्षकों और पुरोहितों की लंबी परंपरा, और आज डॉक्टर, इंजीनियर और पेशेवर।
परिवार का गहरा जुड़ावरिश्ते में दादा जी, नाना जी, चाचा-मामा, बुआ-मौसी सबकी राय होती है।
रस्मों में सादगीदिखावे से ज़्यादा रस्मों को सही ढंग से निभाना ज़रूरी।
अतिथि सत्कारसमाज का मेहमान कभी पराया नहीं।
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हमारी अपनी परंपरा

बीकानेर का पुष्करणा सावा

एक दिन, एक मुहूर्त, और बीकानेर के परकोटे में सैकड़ों शादियाँ। हर परिवार अपनी रस्मों और अपने पंडित जी के साथ अलग शादी करता है; साझा होते हैं दिन, और सादगी व एकता की भावना।

~400वर्ष पुरानी परंपरा, ज़्यादातर विवरणों के अनुसार
2वर्ष के अंतर पर, हाल की ख़बरों के अनुसार
10 फ़र 2026सबसे हाल का सावा
शिव–पार्वतीके नाम से मुहूर्त निकलता है, पूरे परकोटे को एक परिवार मानकर

अगले सावे की तिथि समाज के पंडित तय करते हैं और समाज घोषणा करता है; कृपया उसी घोषणा का इंतज़ार करें।

सावे की पूरी कहानी पढ़ें
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पहली हाँ से विदाई तक

विवाह की रस्में

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    रिश्ता पक्कामुलाक़ातों, कुंडली मिलान और गोत्र जाँच के बाद परिवार हाँ कहते हैं, अक्सर घर पर मिठाई और थोड़े शगुन के साथ।
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    सगाईवर का तिलक, नारियल, मिठाई और शगुन के साथ; कई परिवारों में अंगूठी; बड़ों का आशीर्वाद।
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    मुहूर्तपारिवारिक पंडित जी दोनों कुंडलियाँ देखकर शुभ तिथियाँ बताते हैं।
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    कुमकुम पत्रिकापहला निमंत्रण श्री गणेश और कुलदेवी को अर्पित किया जाता है।
  5. 5
    गणेश पूजाकुछ दिन पहले घर पर पूजा से रस्मों की शुरुआत, ताकि सब निर्विघ्न हो।
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    हल्दी, मेहंदी, गीतदोनों घरों में हल्दी (पीठी या बान), महिलाओं के विवाह गीत, फिर मेहंदी।
  7. 7
    मायरा (भात)ननिहाल कपड़े, गहने और उपहार लाता है; मामा जी का खास स्थान।
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    बारातबारात का स्वागत तोरण और आरती से।
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    फेरे और सात वचनकन्यादान, अग्नि के फेरे, सात वचन, सिंदूर और मंगलसूत्र।
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    विदाई और गृह प्रवेशबेटी की विदाई, और नए घर में दहलीज़ पर कलश के साथ स्वागत।

रीतियाँ हर शहर और परिवार में थोड़ी अलग होती हैं; अपने परिवार की रीति बड़ों से पूछें।

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राजस्थान से दूर रहने वाले परिवारों के लिए

बड़ों से पूछने की चार बातें

कई युवा मूल स्थान से दूर पले-बढ़े हैं। दादा-दादी, नाना-नानी से एक बातचीत आपको वही सब दे देती है जो परिवार बायोडाटा में देखते हैं।

  • आपका गोत्र और माँ का गोत्र (ननिहाल गोत्र)
  • आपका अवटंक और मूल स्थान
  • दादा जी और नाना जी के नाम और उनके गाँव
  • आपकी कुलदेवी और परिवार की परंपराएँ
इन्हें अपने बायोडाटा में जोड़ें

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