पुष्करणा समाज, एक जगह
नई पीढ़ी और राजस्थान से दूर रहने वाले परिवारों के लिए: हम कहाँ से हैं, परिवार कैसे पहचाने जाते हैं, हमारे मूल्य क्या हैं, और हमारी शादियाँ कैसे होती हैं।
समाज का इतिहास परिवारों और बड़ों से आगे बढ़ता है, और हर परिवार की बातों में थोड़ा अंतर होता है। यह एक सामान्य परिचय है; अपनी वंश परंपरा और रीतियों के लिए अपने बड़े और पारिवारिक पंडित जी ही सबसे अच्छे मार्गदर्शक हैं।
पुष्कर से दुनिया तक
पुष्करणा नाम परंपरा से अजमेर के पास पवित्र सरोवर वाले पुष्कर से जुड़ा है। सदियों में समाज पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय नगरों में फैला, और वहाँ से व्यापार, नौकरी और पढ़ाई के लिए गुजरात और देश के बड़े शहरों तक, और फिर विदेश तक। मूल स्थान, यानी "गाँव", दूर जन्मे परिवारों की पहचान का भी हिस्सा रहता है।
- पुष्करपवित्र सरोवर
- पश्चिमी राजस्थानमरुस्थल के नगर
- पूरा भारतव्यापार, नौकरी, पढ़ाई
- पूरी दुनियाखाड़ी, ब्रिटेन, अमेरिका
गोत्र और अवटंक
परिवार की वंश परंपरा को किसी ऋषि से जोड़ता है। एक ही गोत्र (सगोत्र) में विवाह नहीं होता, और ज़्यादातर परिवार माँ का गोत्र, यानी ननिहाल गोत्र, भी टालते हैं। यह साइट हर प्रोफ़ाइल पर दोनों की जाँच करती है।
परिवार का उपनाम। हर अवटंक किसी गोत्र से जुड़ा है, इसलिए बड़े अक्सर उपनाम सुनते ही गोत्र बता देते हैं।
समाज के मूल्य
बीकानेर का पुष्करणा सावा
एक दिन, एक मुहूर्त, और बीकानेर के परकोटे में सैकड़ों शादियाँ। हर परिवार अपनी रस्मों और अपने पंडित जी के साथ अलग शादी करता है; साझा होते हैं दिन, और सादगी व एकता की भावना।
अगले सावे की तिथि समाज के पंडित तय करते हैं और समाज घोषणा करता है; कृपया उसी घोषणा का इंतज़ार करें।
सावे की पूरी कहानी पढ़ेंविवाह की रस्में
- 1रिश्ता पक्कामुलाक़ातों, कुंडली मिलान और गोत्र जाँच के बाद परिवार हाँ कहते हैं, अक्सर घर पर मिठाई और थोड़े शगुन के साथ।
- 2सगाईवर का तिलक, नारियल, मिठाई और शगुन के साथ; कई परिवारों में अंगूठी; बड़ों का आशीर्वाद।
- 3मुहूर्तपारिवारिक पंडित जी दोनों कुंडलियाँ देखकर शुभ तिथियाँ बताते हैं।
- 4कुमकुम पत्रिकापहला निमंत्रण श्री गणेश और कुलदेवी को अर्पित किया जाता है।
- 5गणेश पूजाकुछ दिन पहले घर पर पूजा से रस्मों की शुरुआत, ताकि सब निर्विघ्न हो।
- 6हल्दी, मेहंदी, गीतदोनों घरों में हल्दी (पीठी या बान), महिलाओं के विवाह गीत, फिर मेहंदी।
- 7मायरा (भात)ननिहाल कपड़े, गहने और उपहार लाता है; मामा जी का खास स्थान।
- 8बारातबारात का स्वागत तोरण और आरती से।
- 9फेरे और सात वचनकन्यादान, अग्नि के फेरे, सात वचन, सिंदूर और मंगलसूत्र।
- 10विदाई और गृह प्रवेशबेटी की विदाई, और नए घर में दहलीज़ पर कलश के साथ स्वागत।
रीतियाँ हर शहर और परिवार में थोड़ी अलग होती हैं; अपने परिवार की रीति बड़ों से पूछें।
बड़ों से पूछने की चार बातें
कई युवा मूल स्थान से दूर पले-बढ़े हैं। दादा-दादी, नाना-नानी से एक बातचीत आपको वही सब दे देती है जो परिवार बायोडाटा में देखते हैं।
- आपका गोत्र और माँ का गोत्र (ननिहाल गोत्र)
- आपका अवटंक और मूल स्थान
- दादा जी और नाना जी के नाम और उनके गाँव
- आपकी कुलदेवी और परिवार की परंपराएँ
